परिचय
नवग्रह शांति पूजा हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। नवग्रह का अर्थ है नौ ग्रह – सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु। ये सभी ग्रह मानव जीवन पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव डालते हैं।
जब कुंडली में किसी ग्रह की स्थिति अशुभ होती है या ग्रह दोष उत्पन्न होता है, तब जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं जैसे स्वास्थ्य, धन, करियर, विवाह और मानसिक तनाव देखने को मिलते हैं। ऐसे में नवग्रह शांति पूजा ग्रहों के अशुभ प्रभाव को शांत करने और शुभ फल प्राप्त करने का प्रभावशाली उपाय मानी जाती है।
नवग्रह शांति पूजा का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
शास्त्रों के अनुसार नवग्रह देवता ब्रह्मांडीय शक्तियों के प्रतिनिधि हैं। प्रत्येक ग्रह जीवन के किसी न किसी क्षेत्र को प्रभावित करता है। ग्रहों के असंतुलन से व्यक्ति को कष्ट भोगना पड़ता है।
नवग्रह शांति पूजा से
- ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा शांत होती है
- कुंडली के दोष कम होते हैं
- शुभ ग्रहों की कृपा प्राप्त होती है
यह पूजा विशेष रूप से कुंडली दोष, ग्रह दशा या अंतरदशा के समय कराई जाती है।
नवग्रह और उनका जीवन पर प्रभाव
सूर्य आत्मबल, सम्मान और नेतृत्व का कारक है।
चंद्र मन, भावनाओं और मानसिक शांति से जुड़ा होता है।
मंगल साहस, ऊर्जा और पराक्रम का प्रतीक है।
बुध बुद्धि, वाणी और व्यापार को प्रभावित करता है।
बृहस्पति ज्ञान, धर्म और भाग्य का कारक है।
शुक्र प्रेम, सौंदर्य और वैवाहिक सुख से जुड़ा होता है।
शनि कर्म, न्याय और संघर्ष का प्रतीक माना जाता है।
राहु भ्रम, आकस्मिक घटनाओं और भौतिक इच्छाओं को दर्शाता है।
केतु मोक्ष, वैराग्य और आध्यात्मिक उन्नति से जुड़ा होता है।
इनमें से किसी भी ग्रह की अशुभ स्थिति जीवन में असंतुलन ला सकती है।
नवग्रह शांति पूजा करने का शुभ समय
नवग्रह शांति पूजा किसी भी दिन की जा सकती है, लेकिन कुछ अवसर विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं।
- ग्रह दशा या महादशा की शुरुआत में
- जन्मदिन या जन्म नक्षत्र पर
- अमावस्या या पूर्णिमा
- गुरुवार, सोमवार या शनिवार
- कुंडली दोष निवारण के समय
प्रातः काल पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है।
नवग्रह शांति पूजा की तैयारी
पूजा से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मन, वाणी और कर्म की शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।
आवश्यक पूजा सामग्री
- नवग्रह मंडल या नवग्रह प्रतिमा
- कलश, जल और गंगाजल
- पुष्प और अक्षत
- धूप, दीप और अगरबत्ती
- नवग्रहों से संबंधित दान सामग्री
- हवन सामग्री
नवग्रह शांति पूजा की संपूर्ण विधि
1. संकल्प
पूजा की शुरुआत में भगवान गणेश और नवग्रह देवताओं का स्मरण कर शांति के लिए संकल्प लिया जाता है।
2. गणेश पूजन
सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है ताकि पूजा निर्विघ्न संपन्न हो।
3. नवग्रह आवाहन
नवग्रह देवताओं का विधिवत आवाहन किया जाता है और उन्हें आसन प्रदान किया जाता है।
4. नवग्रह पूजन
प्रत्येक ग्रह को जल, पुष्प, अक्षत और नैवेद्य अर्पित किया जाता है।
5. मंत्र जाप
हर ग्रह के लिए उसके विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है।
6. हवन
नवग्रह शांति हवन किया जाता है जिससे नकारात्मक प्रभाव नष्ट होते हैं।
7. आरती और विसर्जन
पूजा के अंत में नवग्रह देवताओं की आरती कर क्षमा याचना की जाती है।
नवग्रह शांति पूजा के प्रमुख मंत्र
- ॐ सूर्याय नमः
- ॐ चंद्राय नमः
- ॐ मंगलाय नमः
- ॐ बुधाय नमः
- ॐ बृहस्पतये नमः
- ॐ शुक्राय नमः
- ॐ शनैश्चराय नमः
- ॐ राहवे नमः
- ॐ केतवे नमः
इन मंत्रों का श्रद्धा से जाप ग्रहों को शांत करता है।
नवग्रह शांति पूजा में सावधानियां
- पूजा के दिन सात्त्विक आहार लें
- नकारात्मक विचारों से दूर रहें
- ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को दान दें
- नियमित रूप से ग्रह मंत्रों का जाप करें
नवग्रह शांति पूजा से मिलने वाले लाभ
इस पूजा से जीवन में स्थिरता और संतुलन आता है। ग्रह दोषों का प्रभाव कम होता है और भाग्य का साथ मिलने लगता है। करियर में उन्नति, विवाह में सुधार, स्वास्थ्य लाभ और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
नवग्रह शांति पूजा का आध्यात्मिक संदेश
नवग्रह शांति पूजा हमें यह सिखाती है कि जीवन में आने वाली समस्याएं केवल ग्रहों के कारण नहीं, बल्कि हमारे कर्मों से भी जुड़ी होती हैं। जब हम श्रद्धा, संयम और सकारात्मक कर्मों के साथ पूजा करते हैं, तब जीवन की दिशा बदलने लगती है।
निष्कर्ष
नवग्रह शांति पूजा ग्रहों के अशुभ प्रभाव को शांत करने का एक प्रभावशाली उपाय है। विधि और श्रद्धा से की गई यह पूजा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने में सहायक होती है।
✨ जय नवग्रह देवता ✨



